सुखकर्ता दुःखहर्ता, वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम, कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची।
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥ जय देव जय देव।
रत्नखचित फरा, तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी, कुमकुम केशरा।
हिरेजडित मुकुट, शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया। जय देव जय देव…
लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना।
सरळ सोंड वक्रतुंड, त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना॥ जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती।
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यह समर्थ रामदास स्वामी रचित मराठी भाषा की सबसे प्रसिद्ध गणपति आरती है, जिसे महाराष्ट्र में “श्री गणपतीची आरती” भी कहा जाता है। इसमें गणपति जी को सुख देने वाले, दुःख हरने वाले और संकट निवारक देवता के रूप में वर्णित किया गया है।
Composed by Samarth Ramdas Swami, this is the most famous Marathi Ganpati aarti (also called “Shri Ganpatichi Aarti”), widely sung across Maharashtra during Ganesh Chaturthi. It describes Ganesha as the remover of obstacles and giver of happiness, adorned with a jewelled crown and sandal paste, and prays to him for protection and refuge.