आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा।
चरणरजातळी द्यावा, विसावा भक्तां॥
जाळुनियां आनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग।
मुख अष्टक हे प्रसंग, अखंडपणे जागे॥
आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा॥
जयाला ना कोणी, त्याला तूं आधार।
दीनांच्या जीवना, आहे आधार साईनाथा॥
आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा॥
हरीहर की मूर्ति, तुम्हीं जगत विश्वंभर।
अठरा पगड़ जाती, तुझ्या ठायी सब शरण॥
आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा॥
सबका मालिक एक, यही तुम्हारा संदेश।
हिन्दू मुस्लिम भेद मिटाया, शिरडी बना तीर्थ विशेष॥
आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा।
चरणरजातळी द्यावा, विसावा भक्तां॥
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यह आरती शिरडी साईं बाबा की सबसे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय आरती है, जिसे माधवराव बी. आडकर द्वारा रचित माना जाता है। यह सभी पाँचों दैनिक आरतियों में गाई जाती है और साईं भक्तों में सर्वाधिक प्रचलित है। इसमें साईं बाबा को सुख देने वाला, दीनों का आधार तथा सभी जाति-धर्मों से परे सर्वव्यापी सद्गुरु बताया गया है।
This is the most famous and widely sung aarti of Shirdi Sai Baba, traditionally attributed to Madhavrao B. Adkar. It is sung during all five daily aartis at Shirdi and is the most popular Sai Baba devotional song, describing Baba as the giver of happiness, the support of the helpless, and a universal Sadguru beyond caste and creed.