Shri Krishna Govind Hare Murari
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेव॥
जिह्वे पिबस्वामृतमेतदेव।
गोविन्द दामोदर माधवेति॥
गोविन्द जय जय, गोपाल जय जय।
राधा रमण हरि, गोविन्द जय जय॥
गोविन्द जय जय, गोपाल जय जय।
राधा रमण हरि, गोविन्द जय जय॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं।
गोविन्दं भज मूढ़मते॥
संप्राप्ते सन्निहिते काले।
नहि नहि रक्षति डुकृञ्करणे॥
यमुना तट पर रास रचाये।
मुरली मधुर सुनाये॥
राधा संग रंग जमाये।
मन मोहन सुख दिखलाये॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेव॥
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Hindi Translation
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गान है। इसमें भगवान को गोविन्द, मुरारी, नारायण, वासुदेव जैसे नामों से पुकारा गया है। यह आदि शंकराचार्य रचित “भज गोविन्दम्” स्तोत्र की पंक्तियों को भी समाहित करता है, जो जीवन की नश्वरता और भगवद्भक्ति के महत्व को दर्शाता है। यमुना तट की रासलीला और राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का भी वर्णन है।
English Translation
This bhajan glorifies Lord Krishna, addressing Him as Govind, Murari, Narayan and Vasudev. It also includes lines from Adi Shankaracharya’s “Bhaja Govindam”, reminding devotees of life’s impermanence and the importance of devotion. It describes the divine raas leela on the banks of the Yamuna and the eternal love of Radha and Krishna.
Significance
How to Chant?
शांत मन से बैठकर या खड़े होकर, ताली बजाते हुए लयबद्ध रूप से गाएं। मंदिर में आरती या कीर्तन के समय समूह में गाना विशेष फलदायी माना जाता है।
Number of Repetitions
कम से कम 3 बार अथवा श्रद्धानुसार जितनी बार चाहें
Best Time to Chant
प्रातःकाल, संध्या आरती के समय अथवा जन्माष्टमी पर्व पर
Benefits of Aartis
- Brings peace, positivity, and spiritual energy
- Helps strengthen devotion and faith in God
- Creates a peaceful atmosphere at home and temples
- Traditionally performed during daily worship and festivals