अंबे तू है जगदंबे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती, जग जननी जय जय जय माता। ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
तेरा दर्शन पाकर माता, अपना आप गंवाओं।
आके तेरी भक्ति में माता, सब कुछ आज लुटाओं॥ अंबे तू है…
तू ही ब्रह्म तू ही विष्णु महेश्वरी, तू ही सृष्टि तू ही पालनकरी।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥ अंबे तू है…
जय जय जय अंबे जय जग दंबे, तेरे भक्तों की बिगड़ी बना दे।
मैया बिगड़ी बना दे, अपनों को आप दिखा दे॥ अंबे तू है जगदंबे काली।
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यह लोकप्रिय आरती माँ दुर्गा को अंबे (आदि शक्ति) और जगदंबे काली के रूप में स्तुति करती है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर सभी रूपों में स्वयं हैं। भक्त माता से अपनी बिगड़ी हुई बात बनाने और अपना सौभाग्य प्रकट करने की प्रार्थना करता है।
This widely loved devotional aarti addresses Goddess Durga as Ambe, the world-mother who is one with Brahma, Vishnu and Mahesh (the creator, sustainer and destroyer). The devotee prays that the Goddess resolve every difficulty in her devotees’ lives and reveal herself to them, praising her greatness together with the whole world.