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Shri Banke Bihari Ji Ki Aarti
Deity:

Shri Banke Bihari Ji Ki Aarti

श्री बांके बिहारी लाल की आरती।
जय हो वृन्दावन बिहारी की॥

तिरछी चितवन मुरली अधर धरे।
भक्तन के दुःख हारी की॥
जय हो वृन्दावन बिहारी की॥

पीताम्बर तन शोभित सुन्दर।
कुण्डल श्रवण संवारी की॥
राधा वल्लभ प्रीतम प्यारे।
सेवा करूं तुम्हारी की॥
जय हो वृन्दावन बिहारी की॥

निधिवन में रास रचाये।
गोपी संग खिलारी की॥
शरण पड़ा हूं दास तुम्हारा।
लाज रखो अब मेरी की॥
जय हो वृन्दावन बिहारी की।
जय हो वृन्दावन बिहारी की॥

You Can Also Read

Hindi Translation

यह आरती श्री बांके बिहारी जी (भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंगी रूप, वृन्दावन के प्रसिद्ध मंदिर के आराध्य) की स्तुति में गाई जाती है। इसमें उनकी तिरछी चितवन, मुरलीधारी रूप और वृन्दावन-निधिवन की लीलाओं का वर्णन है।

English Translation

This aarti praises Shri Banke Bihari Ji, the beloved tribhanga form of Lord Krishna worshipped at the famous Vrindavan temple, describing His enchanting glance, flute-bearing form and pastimes in Nidhivan.

Significance

वृन्दावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन इस आरती का गायन होता है। यह भक्तों को कृष्ण के सौंदर्य और उनकी दिव्य लीलाओं से जोड़ती है।

How to Chant?

संध्या आरती के समय दीपक और घंटी के साथ खड़े होकर गाएं।

Number of Repetitions

1 से 3 बार

Best Time to Chant

संध्या आरती के समय

Benefits of Aartis