Discover Timeless Wisdom. Explore Hindu Mythology, Festivals & Spiritual Knowledge.

Today: [mm_panchang field="today_tithi"] • [mm_panchang field="today_nakshatra"]

English ▾

Home > Chalisa >  > Nag Devta Ki Aarti
Nag Devta Ki Aarti
Deity:

Nag Devta Ki Aarti

जय नाग देवता जय शेषनाग।
जय वासुकी अनंत महान॥
जय नाग देवता जय शेषनाग॥

क्षीरसागर में शेष शय्या।
विष्णु शयन करते हैं जिस पर॥
पाताल लोक के तुम अधिपति।
धरती को धारण करते हो जिस पर॥
जय नाग देवता जय शेषनाग॥

वासुकी बने मंथन रस्सी।
समुद्र मंथन में सहायक बनी॥
शिवजी के गले की शोभा।
नाग देवता तुम्हारी महिमा अनंत॥
जय नाग देवता जय शेषनाग॥

नाग पंचमी पर पूजा तेरी।
दूध अर्पण भक्ति सच्ची मेरी॥
विष भय दूर करो हे नागराज।
रक्षा करो हे नाग देवता आज॥
जय नाग देवता जय शेषनाग।
जय नाग देवता जय शेषनाग॥

You Can Also Read

Hindi Translation

यह आरती नाग देवताओं – शेषनाग, वासुकी और अनंत – की स्तुति में रचित है। इसमें भगवान विष्णु की शेषशय्या, समुद्र मंथन में वासुकी की भूमिका और शिवजी के गले की शोभा बढ़ाने वाले नागों की महिमा का वर्णन है।

English Translation

This aarti glorifies the Naga deities — Sheshnag, Vasuki and Ananta — describing Sheshnag as Lord Vishnu’s cosmic serpent bed, Vasuki’s role in the churning of the ocean, and the serpents adorning Lord Shiva’s neck.

Significance

यह आरती नाग पंचमी पर्व पर नाग देवताओं की पूजा के समय गाई जाती है। सर्प भय और विष दोष से मुक्ति के लिए भक्त इस आरती का पाठ करते हैं।

How to Chant?

नाग पंचमी के दिन नाग प्रतिमा या चित्र के समक्ष दूध अर्पित कर, दीपक जलाकर गाएं।

Number of Repetitions

1 से 3 बार

Best Time to Chant

नाग पंचमी पर्व पर, अथवा सर्प दोष निवारण पूजा के समय

Benefits of Aartis