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Chandra Dev Ki Aarti
Deity:

Chandra Dev Ki Aarti

जय चंद्र देव जय सोम देव।
शीतलता के दाता देव॥
रजनी के तुम राजा हो।
तारों के तुम स्वामी हो॥
जय चंद्र देव जय सोम देव॥

क्षीरसागर से प्रकट हुए तुम।
अत्रि ऋषि के पुत्र कहाए॥
सोलह कलाओं के तुम स्वामी।
अमृत रस बरसाए॥
जय चंद्र देव जय सोम देव॥

रोहिणी के तुम प्रिय पति हो।
औषधि के अधिपति हो॥
मन के कारक तुम कहलाते।
शीतल किरणें बरसाते॥
जय चंद्र देव जय सोम देव॥

शरण पड़ा हूं देव तुम्हारी।
शांति दो मन को हे उपकारी॥
चंद्र देव की आरती गाऊं।
शीतलता सबको दिलवाऊं॥
जय चंद्र देव जय सोम देव।
जय चंद्र देव जय सोम देव॥

You Can Also Read

Hindi Translation

यह आरती चंद्र देव (सोम) की स्तुति में रचित है, जो रात्रि के अधिपति, मन के कारक ग्रह और औषधियों के स्वामी माने जाते हैं। इसमें उनके क्षीरसागर से प्रकटीकरण, सोलह कलाओं और रोहिणी के प्रिय पति के रूप में उनका वर्णन है।

English Translation

This aarti glorifies Chandra Dev (the Moon), lord of the night, ruler of the mind in astrology, and lord of herbs and medicinal plants. It describes his emergence from the ocean of milk, his sixteen phases (kalas), and his devotion to Rohini.

Significance

ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना जाता है। यह आरती चंद्र दोष निवारण, मानसिक शांति और पूर्णिमा/करवा चौथ जैसे व्रतों में चंद्र पूजन के समय गाई जाती है।

How to Chant?

संध्या समय चंद्रोदय के बाद दीपक जलाकर गाएं।

Number of Repetitions

1 से 3 बार

Best Time to Chant

पूर्णिमा, करवा चौथ अथवा सोमवार की संध्या को

Benefits of Aartis