हम श्री गणेश आरती इसलिए गाते हैं क्योंकि:
- आध्यात्मिक महत्व – गणेश जी की आरती गाने से सकारात्मक ऊर्जा और भक्तिभाव उत्पन्न होता है।
- परंपरा और संस्कृति – यह सदियों पुरानी परंपरा है जो हमें भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने में मदद करती है।
- शुभता और सफलता – भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, उनकी आरती गाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- भक्ति और एकता का प्रतीक – जब सभी मिलकर आरती गाते हैं, तो यह भक्तों में एकता और सामूहिक शक्ति का अनुभव कराता है।
क्या आप श्री गणेश आरती का अर्थ भी जानना चाहेंगे?
।। श्री गणेश जी की आरती।।
jai ganesh deva lyrics
॥ श्री गणेशजी की आरती ॥
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2
एकदन्त दयावन्त,चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे,मूसे की सवारी॥ x2
(माथे पर सिन्दूर सोहे,मूसे की सवारी॥)
पान चढ़े फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।
(हार चढ़े, फूल चढ़े,और चढ़े मेवा।)
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा॥ x2
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2
अँधे को आँख देत,कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥ x2
‘सूर’ श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2
दीनन की लाज राखो,शम्भु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो,जग बलिहारी॥ x2
जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥ x2
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