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Agni Dev Ki Aarti
Deity:

Agni Dev Ki Aarti

जय अग्नि देव जय अग्नि देव।
हवि वाहक जय अग्नि देव॥
यज्ञों के तुम हो साक्षी।
देवन तक पहुंचाओ हवि, हे अग्नि देव॥
जय अग्नि देव जय अग्नि देव॥

सप्त जिह्वा धारी तेजस्वी।
शुद्ध करो तन-मन हे तेजस्वी॥
पावक रूप सदा तुम पावन।
भस्म करो सब पाप हमारे॥
जय अग्नि देव जय अग्नि देव॥

हवन कुण्ड में प्रकट हुए हो।
मंत्रों से आहुति पाते हो॥
वैश्वानर रूप में बसते हो।
जठराग्नि बन जीवन देते हो॥
जय अग्नि देव जय अग्नि देव॥

शरण पड़ा हूं देव तुम्हारी।
कृपा करो हे ज्योति तुम्हारी॥
अग्नि देव की आरती गाऊं।
मंगल हो सबका यह मैं चाहूं॥
जय अग्नि देव जय अग्नि देव।
जय अग्नि देव जय अग्नि देव॥

You Can Also Read

Hindi Translation

यह आरती अग्नि देव की स्तुति में रचित है, जो यज्ञों में हवि को देवताओं तक पहुंचाने वाले, शुद्धिकरण के देवता माने जाते हैं। इसमें उनके सप्तजिह्वा रूप, वैश्वानर स्वरूप और जठराग्नि (पाचन शक्ति) के रूप में उनके महत्व का वर्णन है।

English Translation

This aarti glorifies Agni Dev, the fire god who carries offerings to the deities in yajnas and represents purification. It describes his seven-tongued form, his presence as Vaishvanara, and as the digestive fire (jatharagni) that sustains life.

Significance

अग्नि देव वैदिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण देवता हैं, जिन्हें प्रत्येक यज्ञ और हवन के प्रारंभ में आहुति दी जाती है। यह आरती हवन-पूजन के अवसर पर गाई जाती है।

How to Chant?

हवन या यज्ञ के समय अग्नि प्रज्वलित कर, आहुति देते समय गाएं।

Number of Repetitions

1 से 3 बार

Best Time to Chant

हवन, यज्ञ अथवा किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में

Benefits of Aartis