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Mahakali Mata Ki Aarti
Deity:

Mahakali Mata Ki Aarti

जय महाकाली माता, जय महाकाली।
संकट हरने वाली, दुःख की टाली॥
जय महाकाली माता, जय महाकाली॥

काली रूप धरा है, दुष्टन संहारी।
रक्तबीज का नाश किया, महिमा तुम्हारी॥
खड्ग खप्पर धारण, मुण्डमाला गले।
भक्तन के संकट में, सदा साथ चले॥
जय महाकाली माता, जय महाकाली॥

श्मशान वासिनी मां, भय हरने वाली।
शिव के हृदय पर, चरण धरने वाली॥
अष्टभुजा धारिणी, तेजोमय काया।
भक्तन पर सदा रहे, तेरी करुण छाया॥
जय महाकाली माता, जय महाकाली॥

आदि शक्ति तू ही है, तू ही है अंत।
तेरी महिमा गावें, ऋषि मुनि संत॥
शरण पड़ा हूं मां तेरी, विनती है यही।
सदा रहे रक्षा तेरी, मां महाकाली॥
जय महाकाली माता, जय महाकाली।
जय महाकाली माता, जय महाकाली॥

You Can Also Read

Hindi Translation

यह आरती देवी महाकाली के उग्र एवं रक्षक स्वरूप की स्तुति में गाई जाती है। इसमें रक्तबीज वध, श्मशान-वासिनी रूप और आदिशक्ति के रूप में उनकी महिमा का वर्णन है। यह पूर्व से प्रचलित “जय काली मां” आरती से भिन्न, महाकाली के विशिष्ट स्वरूप पर केंद्रित है।

English Translation

This aarti praises Goddess Mahakali’s fierce, protective form, describing her slaying of Raktabija, her form as the dweller of cremation grounds, and her glory as the Adi Shakti (primordial power).

Significance

यह आरती नवरात्रि और काली पूजा के अवसर पर देवी के उग्र रूप की उपासना हेतु गाई जाती है। यह भक्तों में निर्भयता और शक्ति की भावना जागृत करती है।

How to Chant?

रात्रि के समय दीपक और धूप के साथ श्रद्धापूर्वक खड़े होकर गाएं।

Number of Repetitions

1 से 3 बार

Best Time to Chant

रात्रि के समय, नवरात्रि एवं काली पूजा पर्व पर

Benefits of Aartis