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Jai Radha Madhav at Sunset
Deity:

Jai Radha Madhav

जय राधा माधव, कुञ्जबिहारी।
गोपीजनवल्लभ, गिरिवरधारी॥

यशोदा नन्दन, ब्रजजनरञ्जन।
यमुना तीर वनचारी॥
जय राधा माधव, कुञ्जबिहारी।

पीताम्बर धारी, वंशीविहारी।
गोपी गण मन हारी॥
मोर मुकुट माथे, बनमाला गले।
राधा प्रिय बनवारी॥
जय राधा माधव, कुञ्जबिहारी।

केशव क्लेशहर, माखनचोर मुरारी।
कालिय दमन बिहारी॥
भक्तवत्सल, करुणा के सागर।
भवसागर से तारी॥
जय राधा माधव, कुञ्जबिहारी।

You Can Also Read

Hindi Translation

यह भजन श्री चैतन्य महाप्रभु की परंपरा से जुड़ा एक प्रसिद्ध कीर्तन है, जिसे भक्तिविनोद ठाकुर रचित माना जाता है। इसमें राधा-माधव (श्रीकृष्ण) के वृन्दावन-लीला रूप की स्तुति की गई है – गोपियों के प्रिय, गिरिराज को धारण करने वाले, यमुना तट पर विचरण करने वाले कुञ्जबिहारी के रूप में।

English Translation

This popular kirtan, associated with the Gaudiya Vaishnava tradition, glorifies Radha and Madhava (Krishna) in His Vrindavan pastimes — beloved of the gopis, lifter of Govardhan hill, the one who roams the banks of the Yamuna as Kunj Bihari.

Significance

यह भजन वृन्दावन की भक्ति परंपरा में अत्यंत लोकप्रिय है और कीर्तन, संकीर्तन एवं मंदिर आरती में नियमित रूप से गाया जाता है। यह राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्त के हृदय में प्रेम-भक्ति जागृत करने के लिए गाया जाता है।

How to Chant?

मृदंग, करताल के साथ लयबद्ध होकर सामूहिक कीर्तन के रूप में गाएं। एकल भक्ति में भी शांत चित्त से गाया जा सकता है।

Number of Repetitions

श्रद्धा और समय अनुसार, सामान्यतः निरंतर कीर्तन के रूप में

Best Time to Chant

प्रातः एवं संध्या समय, विशेषकर जन्माष्टमी और राधाष्टमी पर्व पर

Benefits of Aartis