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CHALISA

श्री भैरव चालीसा

श्री भैरव चालीसा भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव की स्तुति में रचा गया एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है। भगवान भैरव को काशी का कोतवाल तथा भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है। नियमित रूप से भैरव चालीसा का पाठ करने से भय, शत्रु बाधा और तांत्रिक बाधाओं से रक्षा होती है तथा साहस व सुरक्षा की भावना प्राप्त होती है। यहाँ आपको भैरव चालीसा का पूर्ण पाठ हिंदी में, उसका महत्व और पढ़ने की सही विधि मिलेगी।
Deity:

Chalisa (हिंदी)

दोहा श्री गणपति गणराज को, ध्याय धरहूं मैं ध्यान। करहुं बखान बटुक तव, हे भोले भगवान॥ चौपाई जय जय जय भैरव भयकारी। कृपा करहु अब मेरे स्वामी॥1॥ तुम बिन सुख संपत्ति नहिं होई। सुमिरत तुम्हें विपत्ति न कोई॥2॥ शिव स्वरूप तुम अविनाशी। काशी के तुम कोतवाल कहावो॥3॥ काल भैरव और बटुक कहाओ। दोनों रूप में भक्त बचाओ॥4॥ श्वेत वर्ण अरु दिगंबर सोहो। कर त्रिशूल डमरू मन मोहो॥5॥ श्वान वाहन पर करत सवारी। अष्ट सिद्धि नव निधि के धारी॥6॥ नाम अनेक तुम्हारे स्वामी। कोटि कोटि तुमको प्रणामी॥7॥ ब्रह्मा जी को दंड लगायो। पंचम मुख जब छेदन पायो॥8॥ कपाल लिए हाथ में डोलो। ब्रह्महत्या का पाप छूटो॥9॥ काशी में जो पग धरत हैं। तव दर्शन बिन मुक्ति न पावें॥10॥ तुम बिन काशी वास न होई। अंतकाल तुम दर्शन देई॥11॥ बटुक भैरव बालरूप हो। भक्तन के तुम सुखरूप हो॥12॥ आनन्द भैरव अरु रुद्र भैरव। क्रोध भैरव अरु असितांग भैरव॥13॥ चण्ड भैरव संहार भैरव। उन्मत्त भैरव कपाल भैरव॥14॥ भीषण भैरव संहार कारी। अष्ट रूप तव जग विस्तारी॥15॥ जो नर तुमको ध्यान लगावें। भूत प्रेत निकट नहिं आवें॥16॥ तंत्र मंत्र का भय ना राखो। भैरव नाम हृदय में राखो॥17॥ शत्रु नाश हित तुमको ध्यावें। निर्भय हो सब कारज पावें॥18॥ काल भैरव जी रक्षक सारे। चारों दिश में द्वार तिहारे॥19॥ जो जन रविवार व्रत धारे। भैरव जी सब कष्ट निवारे॥20॥ मदिरा अन्न का भोग लगावें। श्रद्धा भाव सहित चढ़ावें॥21॥ तेल चढ़ावें उड़द चढ़ावें। भैरव जी को शीश नवावें॥22॥ जो यह पाठ करे मन लाई। ताकी विपत्ति कटे सब भाई॥23॥ रोग शोक सब दूर पराई। भैरव नाम जपत सुखदाई॥24॥ दुष्ट जनों का नाश करत हो। भक्तन का हर कष्ट हरत हो॥25॥ महाकाल के अंश कहाए। शिव भक्तन के संग सुहाए॥26॥ कृपा करो हे भैरव नाथा। चरण शरण गहि नावों माथा॥27॥ दोहा (समापन) काल भैरव भय हरण, संकट मोचन नाथ। चालीसा यह पाठ कर, पावे मंगल साथ॥
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Description

श्री भैरव चालीसा भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव की स्तुति में रचा गया एक शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है। भगवान भैरव को काशी का कोतवाल तथा भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है। नियमित रूप से भैरव चालीसा का पाठ करने से भय, शत्रु बाधा और तांत्रिक बाधाओं से रक्षा होती है तथा साहस व सुरक्षा की भावना प्राप्त होती है। यहाँ आपको भैरव चालीसा का पूर्ण पाठ हिंदी में, उसका महत्व और पढ़ने की सही विधि मिलेगी।

Hindi Translation

भैरव चालीसा भगवान भैरव की स्तुति में रचित एक भक्ति काव्य है, जिसमें उनके रक्षक स्वरूप, भय व नकारात्मक शक्तियों के नाशक तथा भगवान शिव के उग्र अवतार के रूप में उनकी महिमा का वर्णन किया गया है।

English Translation

The Bhairav Chalisa is a devotional hymn praising Lord Bhairav, the fierce protector form of Lord Shiva. It describes his power to remove fear, negative energies, and enemies, and his blessings of courage, justice, and protection for devotees.

Significance

भय, शत्रु बाधा और तांत्रिक बाधाओं से रक्षा होती है, ऐसी मान्यता है। साहस, आत्मबल और सुरक्षा की भावना बढ़ती है। रविवार व भैरव अष्टमी को पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। न्याय व कानूनी मामलों में सफलता की कामना पूर्ण होती है, ऐसी मान्यता है। नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र से सुरक्षा मिलती है।

How to Chant?

रविवार या भैरव अष्टमी के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान भैरव की प्रतिमा या चित्र के समक्ष तेल का दीपक जलाएं। शांत मन से भैरव चालीसा का पाठ करें। पाठ के बाद कुत्तों को भोजन कराना शुभ माना जाता है, क्योंकि श्वान भैरव जी का वाहन है।

Number of Repetitions

1, 5, 7 या 11 बार

Best Time to Chant

रविवार तथा भैरव अष्टमी के दिन भगवान भैरव के समक्ष पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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Benefits of Reading Chalisa